गौर, ४ फागुन। रौतहट मे पहिल बेर श्री शिव शक्ति महायज्ञ, राजदेवी नगरपालिका ब्रह्मपुरी में आयोजित त्रिदिवसीय संगीतमय श्री राम कथा का तीसरा दिन की कथाका उद्घाटन नेपाली काँग्रेस रौतहट सभापति श्री कृष्णा यादव, राजदेवी नगर पालिका के नगर प्रमुख धीरेन्द्र कुमार सिंह, यज्ञ समिति के अध्यक्ष नवीन कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित शनिबार किया।
इस अवसर पर उन्होंने आचार्य श्री सुदर्शन जीका माला, पट्टीका पहना कर स्वागत करते हुए आज की कथाका आरंभ करनेका अनुरोध किया । कथा आरम्भ करते हुएआचार्य श्री सुदर्शन जी महाराज ने जब तक बाबा को कांवर चढ़ाया नहीं और संकट से मुझको बचाना भजनों से कथाका शुभारंभ किया। तत्पश्चात उन्होंने हनुमान जन्म के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि क्यों हनुमान को शंकर सुवन केसरी नंदन और पवनसुत कहा जाता है । आचार्य श्री ने कहा कि लोग हनुमान को बंदर कहते हैं जबकि ऐसा नहीं है। हनुमान तो अतुलितबलधामं ,हेमशैलाभदेहं दनुजवन कृशानु ज्ञानिनामग्रगण्यां है। राम की ललित नर लीला में वे बंदर की भूमिका में हैं। किष्किंधा कांड के आरंभ में पहली बार जब वे प्रभु श्रीराम से मिलते हैं तो विप्ररूप में मिलते हैं। आचार्य श्री ने स्वरचित सुदर्शन रामायणु का परिचय देते हुए कहा कि मानस में कई ऐसे प्रसंग है, जिसकी चर्चा विस्तार से नहीं है, उसको मैंने विस्तार से लिखा है। जैसे धनुष यज्ञ में राजा जनक ने सभी राजाओं को निमंत्रण किया, लेकिन महाराज दशरथ को निमंत्रण नहीं भेजा। विभीषण राम का बड़ा भाई था आदि प्रसंगों को जानना है तोु सुदर्शन रामायणु अवश्य पढ़ें । सुदर्शन जी महाराज ने समाज में फैली कुरीतियों पर सब का ध्यान आकृष्ट किया और कहा कि आज परिवार में बुजुर्गों की उपेक्षा हो रही है । नए नए वृद्धाश्रमो का निर्माण हो रहा है जो सामाजिक पतन का संकेत है । बाल विवाह और दहेज प्रथा के बारे में भी उन्होंने चिंता प्रकट की येउचित नहीं है । उनका कहना था कि शादी विवाह को खरीद बिक्री नहीं बनाना चाहिए । परिवार में एक दूसरे से प्रेम हो, पति पत्नी के बीच हास परिहास हो । उन्होंने कहा कि जहां प्रेम हो, वही परमात्मा प्रकट होता हैं। हरी व्यापक सर्वर्त्र सामना । प्रेम ते प्रकट होइ मैं जाना ।। कथा के क्रम को आगे बढ़ाते हुए आचार्य श्री ने भगवान राम और जानकी के विवाह की विशेषता की व्याख्या की। मिथिला के पावन धारा धाम पर प्रभु श्री राम अपने भाइयों सहित दूल्हा बनकर पधारे हैं। मिथिला की सखियां उनके रूप सौंदर्य को देखकर अपनी सुध बुध खो बैठती है । वे आपस में बातें करती है कि सुंदर तो सारे राजकुमार है, लेकिन चारों में जो बड़े हैं उनके रूप सौंदर्य को कह पाना संभव नहीं है। सोने की थाल सजाकर राम की आरती उतारी जा रही है । सखिया प्रभु श्री राम को देख मंगल गाना गाती है आज मिथिला नगरिया निहाल सखिया चारो दूल्हा में बड़का कमाल सखिया ।

आचार्य श्री ने कहा कि विवाह गीत भारत की परंपरा के अनुरूप गाए जाते हैं। इसे मंगल गीत भी कहा जाता है । विवाह गीतों में मिथिलांचल की परंपरा की अपनी महक और खुशबू है। मिथिला के विवाह गीतों में अद्भुत सुंदरता होती है। राम जब विवाह मंडप में आते हैं तो सीता की सखिया दूल्हे राम से मजाक करती है और गाली गाती है ।गाली भी सिर्फ दूल्हे को ही नहीं बल्कि उनकी कई पीढ़ियो तक पहुंचाई जाती है। संगीतमय श्री राम कथा के मंच से जब आचार्य श्री ने विवाह गीतों का गाना शुरू किया तो उपस्थित श्रोता अपने को झूमते नाचने से रोक नहीं पाए। श्रोता घंटों तक राम कथा सरोवर में गोते लगाते रहे । कथा विराम के पश्चात फूलों की होली शुरू हुई तो ऐसा लगा कि पूरा पंडाल बृन्दावन बन गया। अद्भुत और मनोहारी दृश्य उपस्थित था। इस अवसर पर रुद्रेश कुमार सिंह बाबू साहेब, शैलेन्द्र कुमार सिंह, सुनील कुमार सिंह, रामनारायण सिंह, नेपाली काँग्रेस रौतहटके उप सभापति सुनील यादव, राजदेवी नगरपालिकाके प्रशासन प्रमुख संजय पांडेय, श्रीराम यादव, रामपुकार सिंह, बैद्यनाथ सिंह, मोनू, कुमार, पिंटू कुमार सिंह, अभिमन्नु पटेल हजारों श्रद्धालु मौजूद थे।

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